कादम्बिनी में ब्लॉगजगत (स्कैन्ड पन्ने)

October 3, 2007 at 5:27 pm | In चिट्ठाजगत |

चिट्ठाजगत के तक़रीबन सभी पाठक जानते हैं कि श्री बालेंदु शर्मा दाधीच (प्रभासाक्षी वाले) ने हिंदी ब्लागिंग से संबंधित लेख लिखा है। यह लेख कादम्बिनी के अक्टूबर अंक में प्रकाशित हुआ है। इस लेख में ब्लागिंग के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये हिंदी ब्लागिंग से जुड़े हुये तमाम मुद्दों पर जानकारी देने की कोशिश की गयी है। आप मूल लेख पढ़ चुके हैं। हालांकि मूल लेख से कुछ अंश हटा दिए गए हैं फिर भी कादम्बिनी के इस लेख को लेकर पाठकों में उत्सुकता बनी हुई थी। अब कादम्बिनी में प्रकाशित लेख के सभी आठ पन्ने पढ़िए। (कादम्बिनी से साभार)



17 Comments »

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  1. ब्लॉगिंग: ऑनलाइन विश्व की आजाद अभिव्यक्ति पढ़ा। इस लेख को लघु रिसर्च रिपोर्ट कहा जा सकता है। पूरा लेख पढ़े बगैर नहीं रह सकते। वाकई आपने खूब मेहनत की है इसे लिखने में। अभी तक ब्‍लॉग और ब्‍लॉगिंग पर प्रकाशित कई लेख पढ़े लेकिन इससे बेहतर और मजेदार नहीं थे। ऐसी रिपोर्ट लिखते समय कुछ नाम छूट सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि कार्य करने वालों का योगदान कम हो जाता है।

    Comment by कमल शर्मा — October 3, 2007 #

  2. अभी अभी बाजार से ले आये पढ़ने के लिये। वाकइ पढ़ कर मजा आया।

    Comment by जगदीश भाटिया — October 3, 2007 #

  3. पढ़कर अच्‍छा लग रहा है। किन्‍तु निराशा हुई कि इसमें केवल बडे़-2 नाम ही शामिल किये गयें चूकिं आज काफी ऐसे ब्‍लागर है जो अच्‍छा लिखते है किन्‍तु उनकी चर्चा नही होती है। आज ब्‍लागिंग में उम्र को न देख कर लेखन को देखना चाहिऐ। चूकिं अगर लेख के माध्‍यम से युवाओं को आगे लाना है तो युवाओं के ब्‍लागों के जिक्र के बिना यह सम्‍भव नही है।

    सभी को हार्दिक बधाई।

    Comment by प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह — October 3, 2007 #

  4. प्रमेन्द्र भाई निराश क्यों होते हो? बड़े नाम हमेशा बाजी मार ले जाते हैं. ब्लागरी में भी यही होगा.

    Comment by sanjay tiwari — October 3, 2007 #

  5. वाह, अच्छा किए जो इसे स्कैन करके यहां पोस्ट कर दिए।

    वाकई, बहुत मेहनत और विस्तार से लिखा गया है चिट्ठाकारी पर।

    Comment by सृजन शिल्पी — October 3, 2007 #

  6. वाकई आपने खूब मेहनत की है इसे लिखने में, अच्छा लगा आपकी प्रस्तुति देखकर, पढ़ कर मजा आया।

    Comment by रवीन्द्र प्रभात — October 3, 2007 #

  7. विनम्र अनुरोध
    मित्रों, सारी टिप्पणियां थोकभाव से बालेंदु जी के हवाले की जाएगी। जिनका नाम छपा है वो अपने हिस्से की खुशियां उनमें बांटे जिनका नहीं छपा है। ज़ाहिर है नौ सौ ब्लॉगरों का नाम प्रकाशित नहीं किया जा सकता था। बालेंदु जी ने महज़ कोशिश की है। एक उम्दा कोशिश। कोई कमी-बेशी रह गई तो रह गई, इस पर तूल-ताना क्या देना।

    Comment by नीरज दीवान — October 3, 2007 #

  8. साधुवादी प्रयास के लिये साधुवाद.

    Comment by समीर लाल — October 3, 2007 #

  9. वाकी बालेंदू जी ने यह एक बहुत ही बढ़िया लेख लिखा है!!

    की बोर्ड के सिपाही का आभार कि उसने स्कैन कर यहां उपलब्ध करवाया!

    Comment by Sanjeet Tripathi — October 3, 2007 #

  10. बालेन्दु जी ने वाकई मे< ऐतिहासिक कार्य का लेखा जोखा तैयार किया है.
    साधुवाद !!
    आपको भी शाबाशी की इसे प्रस्तुत किया नीरज जी.
    – लावण्या

    Comment by लावण्या — October 4, 2007 #

  11. आपने अच्छा प्रयास किया है. मजा आया.

    Comment by sanjay bengani — October 4, 2007 #

  12. आपने चिठ्ठाकारी जगत को आमजन तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है क्योंकि आज भी बहुत कम लोग जानते हैं कि इस तरह से भी आप अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति कर सकते हैं ।

    Comment by विवेक रस्तोगी — October 4, 2007 #

  13. ये बड़े पुन्य का काम किया भाई आपने। इसको देखने के बाद हम कादम्बिनी खरीद के लाये और फ़िर से सबके दीदार किये। शुक्रिया।

    Comment by अनूप शुक्ल — October 5, 2007 #

  14. दीवान साहब …सबसे पहले हमने आपकी “केमिकल लोचा ” वाली पोस्ट पढी थी मजा आ गया था ..बहुत ही अच्छा लिखा था आपने …वाकई आपने खूब मेहनत की है इसे लिखने में।..जल्दी ही आपके ब्लोग पर दुबारा आना होगा ..आपका भी हमारे ब्लोग पर स्वागत है …

    Comment by राज यादव — October 5, 2007 #

  15. वाकई बालेन्दु जी ने काफी गहन शोधपूर्ण लेख लिखा है। आपका धन्यवाद स्कैन की हुई इमेज उपलब्ध कराने के लिए, सचमुच प्रिंट संस्करण का मजा ही अलग होता है। :)

    Comment by श्रीश शर्मा — October 6, 2007 #

  16. सभी मित्रो को इतनी उत्साहवर्धक टिप्पणियों के लिए अनेकानेक धन्यवाद। ब्लॉगिंग जैसे विशाल-विशद-विपुल विषय पर सौ फीसदी तथ्यों को समेट पाना और थोड़ा-बहुत बहकने से बच पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। अभी और बहुत कुछ लिखा जाना है, जो बातें रह गईं उन पर आगे जरूर चर्चा करेंगे। इस लेख का बुनियादी लक्ष्य ब्लॉगिंग के बारे में जागरूकता बढ़ाना ही था। मेरी कोशिश तो यही थी कि निष्पक्ष भाव से लिखा जाए और किसी एक स्थान पर समग्र और प्रामाणिक (?) जानकारी उपलब्ध हो सके। लेकिन हम सबकी मानवीय सीमाएं हैं। मेरी भी।

    लेख को स्कैन करवाकर अपने ब्लॉग पर स्थान देने के लिए नीरज भाई का बहुत बहुत धन्यवाद। मैं सब मित्रों के नाम लिखकर औपचारिक नहीं होना चाहूंगा। आप सभी तो हमारे अपने हैं। अगर किसी को निराशा हुई है तो उसे उलाहना देने का भी हक है और सुझाव देने का भी, जिसका मैं हमेशा स्वागत करूंगा।

    Comment by बालेन्दु शर्मा दाधीच — October 13, 2007 #

  17. यह ख़बर ब्लॉग जगत के लिए एक अच्छी ख़बर है, इस तरह के लेखों से ब्लॉगिंग भारत वर्ष में और फलेगी-फूलेगी, और नये विचारों का जन्म होगा| यह सोचकर मन प्रसन्न हो जाता है|

    Comment by विनय प्रजापति — February 5, 2008 #

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