जय संजू बाबा (आरती)
September 3, 2007 at 4:21 pm | In कटाक्ष | 15 Commentsजय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा
टीआरपी के दाता, भाइयन के भ्राता

बंबई में तुम ब्लास्ट कराए
कीट-मकोड़े मार भगाए
एके छप्पन के तुम दाता
पास कोई फटक ना पाता
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
आर्थर रोड तुम्हारो डेरा
भाई सारे करें वहीं फेरा
यरवदा में जब तुम धाए
जेल चकाचक रौनक लाए
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
तुम्हरी छवि सिब्बलवा भाई
कॉग्रेस पार्टी बिछ-बिछ जाई
बहिन तुम्हारी संसद धाए
सोनिया गांधी को पाठ पढ़ाए
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
सकल टीआरपी तुमरे कारन
छूटे पीछे नाग अरु रावन
मीडिया तुमरे चरण को दासा
भाई लोग रहे नित पासा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
कोडासुर को सबक सिखाए
टाडा के सब चार्ज हटाए
आर्म्स एक्ट तुम्हारी माया
बढ़े चलो नरगिस के जाया
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
सत्य-अहिंसा मार भगाए
गांधी का नव-वर्ज़न लाए
टेरर को तुम दिए नव फेसा
रहे टापते पुलिस और केसा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
पवित्र भई यरवदा सारी
तर गए जेलासीन नर नारी
तेलगी और अबू सलेमा
तुम्हरे बल सब पाए नेमा
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
प्रात जो लेले नाम तुम्हारा
टीआरपी पाए दिन सारा
नेतागर्दी तुम्हीं करावो
वोटों के दाता
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
पाकिस्तान में बजे दुदुंभी
हिन्दुस्तान बने जलकुंभी
तुमसा नहीं एक्टर कोई दूजा
का करि सके करेक्टर लूजा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
अउर किरपा कछु कीजै बाबा
बंबई तो भई बीती बाता
सहस वक़ीलन की तुम माया
दाऊद के खासा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
रचयिता- ज्ञानेंद्रनाथ, सीनियर कॉपी एडीटर, इंडिया टीवी.
अवश्य पढ़े – संजूबाबा चरितलीला
15 Comments »
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वाह जी वाह शानदार जानदर, ये कलम का सिपाही कही छुट्टियो मे कवियो के बीच फस गया लगता है..तभी तो दिनमे समाचारो मे गुण गाता है और सुबह शाम आरती..? धन्य हो लगता है,विधान परिषद या राज्यसभा के टिकट के जुगाड मे है..?
Comment by aroonarora — September 3, 2007 #
सुन्दर ! हम तो नास्तिक से आस्तिक बन गए। ऐसे आजमाए हुए नुस्खे को हमें बताने के लिए धन्यवाद।
घुघूती बासूती
Comment by ghughutibasuti — September 3, 2007 #
वाह, वाह गुरु, मन की बात आसान सी “आरती” मे कह गये… बहुत खूब..
Comment by सुरेश चिपलूनकर — September 3, 2007 #
गुरु चकाचकम्
औ ल्लाओ ऐसी कविता धकाधकम्
झकाझक पढ़बै करेंगे हम
आलोक पुराणिक
Comment by smartnivesh — September 3, 2007 #
शानदार,जानदार, मजेदार, धमाकेदार
Comment by Ankur Gupta — September 3, 2007 #
यह आरती पढ़ कर संजू बाबा जो अगली फिल्म बनाने वाले हैं उसमें आपको कोई ना कोई बड़ी जिम्मेदारी अवश्य देंगे।
Comment by सागर चन्द नाहर — September 3, 2007 #
नीरज भाई
बहुत सही.
अब जरा इसे गाकर (ढोल मजीरा न भी हो तो भी चलेगा) जरा पॉडकास्ट किया जाये, यह जनता की भारी मांग है.
जय हो!! जय हो!!
Comment by समीर लाल — September 3, 2007 #
बहुत बढ़िया….बधाई
Comment by reetesh gupta — September 3, 2007 #
शानधारम्, जानदारम्
मस्त है!
Comment by श्रीश शर्मा — September 4, 2007 #
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
Comment by deepanjali — September 5, 2007 #
me ganpati samor aarti karto ki Munna Bhai la fhashi ho de, Niraprad mansacha tynech bale ghatla.
deepak
Comment by deepak — September 10, 2007 #
send
Comment by megha — August 7, 2008 #
जय हो… और भय हो का मिक्चर लगता है यह कविता पाठ
Comment by suresh chiplunkar — April 1, 2009 #
जै हो..
Comment by संजय बेंगाणी — April 1, 2009 #
अब वो तो चुनाव भी नहीं लड रहे … आरती काहे की।
Comment by संगीता पुरी — April 1, 2009 #