कीबोर्ड का सिपाही

”आठ पोस्ट डिलीट, दो ब्लॉगों के पासवर्ड चोरी”

Posted in चिट्ठाजगत by neerajdiwan on February 20, 2007

इस रचना का किसी से कोई लेना-देना नहीं है अलबत्ता रचना पढ़कर कुछ लोगों को लेने के देने पड़ सकते हैं. यदि आपको इसमें कुछ आपत्तिजनक लग रहा है तो भी आप आपत्ति नहीं जता सकते क्योंकि होली के रंग में भंग डालकर यह रचना लिखी गई है. उखड़ने-उखाड़ने की बातों में उलझकर अपना और लेखक का मूड ना उखाड़े.. आप इसे अन्यथा ना लें क्योंकि लेखक ने अन्यथा ले लिया तो अगला लेख विशेष रूप से आप पर लिखा जाएगा. रचना पढ़ें और कमेंट ज़रूर दें. औरों की कमेंट पढ़कर ना कमेंटियाएं .. धन्यवाद 

  

चित्र सौजन्य- तरकशिया, जो कह सके

सुबह-सुबह मेल और ब्लॉगजगत की ख़बरें देखने के लिए मुंगेरीलाल ने कम्प्यूटर खोला. अक्षरग्राम पर ताज़ा ख़बर इस तरह थी- ”आठ पोस्ट डिलीट, दो ब्लॉगों के पासवर्ड उड़ा लिए गए” नारद जी बता रहे थे- ”ब्लॉगजगत में होने वाले चुनाव के पहले कुछ जगहों पर हिंसक वारदात हुई है. चुनाव आयोग ने चार ब्लॉगियों को अपशब्दों (बोले तो स्लैंडर कैम्पेन) की वजह से कारण बताओ नोटिस जारी किया है. चुनाव २० तक होने हैं और सभी उम्मीदवार दल-बल के साथ मैदान में कूद चुके हैं. प्रचार कार्य ज़ोरों पर है. आयोग से मिली ख़बरों के अनुसार मुख्य चुनाव अधिकारी देबाशीष ने आठ पोस्ट डिलीट करने वालों का पता लगाने का काम जांच एजंसियों को सौंप दिया है. साथ ही दो ब्लॉगियों के पासवर्ड चोरी करने वाले की तलाश जारी है. हालांकि आयोग ने चुनाव शांतिपूर्वक कराने के लिए सभी इंतज़ाम कर लिए हैं. ब्लॉगचोरी करने के मामले में शक की सुई दिल्ली के उस ब्लॉगर पर जाकर टिक रही है जो एक फ़ोरम में नेट हवलदार के पद पर तैनात है.”  ”इधर, ब्लॉग चोरी का खामियाज़ा भुगतने वाले बंधु ने चुनाव आयोग कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठने की धमकी दी है. भुक्तभोगी ब्लॉगिए की मांग की है कि आचार संहिता के उल्लंघन करने वाले उस नेट हवलदार को चुनावी ड्यूटी से हटाया जाए. आयोग ने सभी दलों और उनके प्रत्याशियों को भरोसा दिलाया है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होंगे….” 

मुंगेरी ने इतना ही पढ़ा था कि तभी मोबाइल की घंटी घनघना उठी और कम्प्यूटर से गर्दन हटकर मोबाइल की तरफ़ मुड़ी. कान पर फ़ोन टिकाया था कि उधर से आवाज़ गूंजी- ”ऐ मामू.. वोटिंग करने का है अपने भाई के लिए.” मुंगेरी ने पूछा- ”कौन बोल रहा है बे?” उधर से आवाज़ आई- ”ओएsss मामू. अपुन को नहीं जानता क्या? सर्किट बोल रहा हूं सर्किट!! बताऊं या दिखाऊ? अपना जगदीश भाई खड़ा होरेला है इलेक्शन में.. उसीच्च को वोट देने का है. कल सुबह उठने का और आईना देखकर बस उसीच्च को वोट देने का.. समझा कि नहीं.” हकबकाया मुंगेरी बोला- ”हओ भाई. आप ठीक कहते हो.लेकिन..” सर्किट- ”लेकिन क्या रे?? जादा शानपट्टी कर रेला है क्या? बोला ना जग्गू भाई को ही वोट देने का नहीं तो बताऊं क्या मुन्ना भाई को?” मुंगेरी बोला- ”नहीं नहीं.. भाई वो बात नहीं.. मै भला किसी और को वोट क्यों दूंगा. अपना भाई तो मुन्ना भाई ही है और वो जहां है वहीं वोट दूंगा. ठीक है?” 

अभी फ़ोन रखा ही था कि उधर कम्प्यूटर पर मैसेज उछला.. लिखा था ”हो क्या दादा??” सामने एक और दादा थे. मेरा पन्ना वाले दादा.. मुंगेरी ने जवाब दिया- ”हां भाई, दिख तो यहीं रहा हूं” पन्ना दादा झुंझलाकर बोले- ”अबे.. तो और कहां रहोगे? यहां से कोई गया है क्या?? ब्लॉगजगत से जो जुड़ गया वो कहीं जाने के लायक नहीं रहता. यहीं रहना है अब सारी उमर, किसी और काम के लिए बचे ही नहीं हो तुम. अच्छा सुनो एक काम की बात. वोट दे दिए क्या?” मुंगेरी बोला- ”अभी नहीं दिया हूं भाई.” पन्ना दादा- ”ठीक है. तो जब भी दो याद रखना.. मेरे को वोट देना मत भूलना” मुंगेरी बोला- ”हां भाई. वो तो है आपका तो जवाब ही नहीं. आप लिखते ही इतना अच्छा हो कि हर कोई पढ़ता है और कमेंटाता भी है.”

मन ही मन मुंगेरी बुदबुदा रहा था- ”वैसे भी कौन पंगा लेगा पन्ना दादा से.. कहीं नारद पर पोस्ट लापता हो गई तो समझो दो फूटी कमेंट भी नहीं मिलेगी… यूं भी आप अपनी पोस्ट पर नारद को अटकाते हो और दूसरों की बारी मे बेचारों की पोस्ट ही अटक जाती है. बची-खुची कसर आजकल भरमार बंदूक की तरह कविता छापने वाले हथिया लेते हैं” 

पन्ना दादा के अलसाते ही मुंगेरी बिज़ीबोर्ड टांगकर बची ख़बर आगे पढ़ने लगा. लिखा था- ”मतदान केंद्र तक नही पहुंचने देने के लिए एक गुट ने कुछ मतदाताओं के सिस्टम में ख़तरनाक वायरस डाले हैं. धमकी दी जा रही है कि नारद को फ्रीज कर दिया जाएगा..आईपी जानकर वोट की गोपनीयता तोड़ने के पूरे इंतज़ाम कर लिए गए हैं. ये भी धमकी दी जा रही है कि अगली दफ़ा ब्लॉगर मीट होगी तो जयपुर के पहाड़ से धक्का दे देंगे. या कानपुर के किसी होटल मे घंटों इंतज़ार करवाएंगे और बिना बिल चुकाए भाग जाएंगे नारद के संवाददाता को मिली अपुष्ट ख़बर के मुताबिक कुछ ब्लॉगियों को अगवा कर लिया गया है और उन्हें बीस के बाद ही रिहा किया जाएगा. माना जा रहा है कि इस तरह की वारदातों में मुन्ना-सर्किट के गुर्गे जुटे हुए हैं” 

मुंगेरी इन लाइनों तक ही पहुंचा था कि बिना तीर-कमान का तरकशिया आ गया, कहने लगा- ”मैं तो हैरान हूं कि इन चुनावों को इतना हाईप्रोफ़ाइल क्यों बताया जा रहा है. ये तो ग़लत बात है चुनावों में इस तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए. हमें देखो. हमारे पोल में तो कोई झगड़ा-रगड़ा नहीं हुआ था. और आप लोग रोते हो कि गुजरात में प्रतिक्रियावाद ज़ोरों पर हैं.” 

मुंगेरी ने कहा- ”हां भाई ये सही है.. चुनाव के दौरान और चुनावों के पहले हिंसा में कुछ तो फ़र्क होती ही है. ख़ैर छोड़ो, आप बताओ किसके लिए कैंपेन कर रहे हो?  तरकशिया बोला- ”काहे करें कैंपेन. हम तो सोच रहे थे कि आप ही खड़े होगे.” यह सुनकर मुंगेरीलाल की आंखें मिचमिचाने लगीं..झूठी तारीफ़ सुनकर खुशी से फूला नहीं समा रहा था. इससे पहले कि मुंगेरी अपनी उज्जवल संभावनाओं पर कुछ और खुलासा करने के लिए तरकशिया को तपासता.. तरकशिया किनारे लग गया और ‘अत्यंत व्यस्त’ का बोर्ड टांगकर गुम हो गया. 

मुंगेरी का मोबाइल बज उठा. मुंगेरी के मित्र गुरूगंभीर दूसरी तरफ़ थे. मुंगेरी ने नंबर देख दुआ-सलाम के बाद पूछना शुरू किया.. ”कैसा चल रहा है भाई चुनाव प्रचार”. सृजन और शिल्प में माहिर गुरूगंभीर संभलकर बोले.. ”मैं तो विश्वास ही नहीं करता ये सब चुनाव वगैरह पर कुछ मित्रों ने मेरा नाम प्रस्तावित कर ही दिया है तो मैं आ गया हूं मैदान पर”  इस पर चटुता की कला में माहिर मुंगेरी बोला- ”नहीं गुरूजी, आप तो बेमिसाल लिखने वाले हैं आपकी शैली तो लाजवाब है. आप जैसे ही अव्वल रहते हैं.” अपनी उज्जवल संभावनाओं को हाईट पर जाते देख गुरूगंभीर ने आगे कहा- ”ऐसा है मुंगेरी भाई, असफल व्यक्ति ही जानता है कि सफलता किन रास्तों से आती है और हम जैसों को देखते कि फ़ौरन रास्ता बदल लेती है. तो क्या करना चुनाव के चक्कर में पड़कर..अपन मास अपील नहीं रखते यार” इससे पहले कि मुंगेरी गुरूगंभीर के महाजनीनुमा विचार सुनकर उमादी की याद दिलाता गुरूगंभीर के खाते पर ताला लग चुका था. 

चुनावी पंगेबाज़ी से अब ऊब चुके मुंगेरी को गुटखे की तलब लगी थी.. वो कम्प्यूटर से उतरकर घर के बाहर आया और पान की ठेली की ओर बढ़ चला. तभी चार आदमी उसके पीछे हो लिए.. ऊपी स्टाइल कुर्ता पायजामा पहने पहलवाननुमा वे सारे आपस में बुदबुदा रहे थे..”लगता है यही मुंगेरी है… ” इतना सुनकर मुंगेरी की चाल तेज़ हो गई..सुबह से ही बेचारा धमकी-चमकी से परेशानहाल था. अभी ठेली की तरफ़ बढ़ा ही था कि चारों पहलवानों ने मुंगेरी को घेर लिया और ले गए कार की तरफ़. कार में बिठाकर ढक्कनपुरवा के सुनसान इलाक़े की ओर ले गए.

वहां पहुंचने के बाद एक पहलवान मुंगेरी की ओर लपका. बाक़ी लोग उसे शुकुल उस्ताद कह रहे थे. शुकुल बोला, ”हां बेटा, ये बताओ किसे वोट दे रहे हो?” मौक़े की नज़ाकत देख मुंगेरी ने फ़ौरन कहा- ”अपना तो फ़ेवरिट फुरसतिया है.” शुकुल बोला- ”काहे?” मुंगेरी ने कहा- ”अरे उस्ताद, उनके लेख वज़नदार होते हैं.. ब्लॉग अच्छा, लेख अच्छे तो वोट भी उनको दूंगा ना..” शुकुल- ”अबे तुम कमेंट दिया करो. फुरसतिया के साबूनुमा लेख काहे पढ़ते हो?” मुंगेरी बोला- ”नहीं नहीं जी, बिना लेख पढ़े कोई कमेंट देता है क्या?” शुकुल- ”हम देते हैं ना.. तुम्हारी मति मारी गई है क्या? इतने लंबे लंबे साबूनुमा लेख पढ़ते हो? हमारी तरह कमेंट पढ़कर अपनी कमेंट मारा करो. मान लो किसी ने लिखा है कि ‘सुंदर रचना’… तो तुम लिखो ‘बेहतरीन.’. किसी ने दोनो लिख मारा तो तुम लिखो- ‘अल्टीमेट’. समझे कि नहीं.. अब देखो मनीष को वो कैसे अपनी अच्छी-भली कविताएं पढ़वाने के लिए बेचारा गली-गली के कवियों की रचनाओं के नीचे कमेंटखानों में तारीफ़ों के पुल बांधता है. तुम भी वैसा ही करो.” हैरान मुंगेरी इस गीता-रहस्य से पहली बार परिचित हो रहा था. वो खुश हुआ और बोला- ”वाह उस्ताद, क्या बात किए हो.. इसी खुशी में उड़नतश्तरी नामक एक कुन्डली मेरी तरफ़ से सुनो.”   

अभी दो पंक्तियां ही बांची थी कि शुकुल चिल्ला पड़ा- अबे…ये रचना उड़नतश्तरी की नहीं हैं.. ये डॉक्टर टंडन की स्लीप थैरेपी है. मुंगेरी को अपने अज्ञानी होने पर भरोसा न हुआ. वो बोला- नहीं उस्ताद, ये रचनाएं उड़नतश्तरी नामक पन्ने से उठाई गईं है. इस खुशी के मौक़े पर आपकी खिदमत में सुना रहा था इस पर शुकुल के बगल में खड़ा कालिया बोला- उस्ताद पिछले हफ़्ते जब आपको नींद नहीं आने की बीमारी हुई थी तब डॉक्टर टंडन ने यह रचना पुड़िया में दी थी. आजकल तो हम सब इसी पुड़िया का सेवन करते हैं और मस्त खर्राटे मारते हैं. शुकुल का माथा चढ़ चुका था.. उसने गुर्गों को हुकुम दिया कि मुंगेरी को वापस छोड़ आएं.  

मुंगेरी को वापस घर तक छोड़ दिया गया. थककर पलंग पर लेटा टीवी का रिमोट हाथ में लेकर फुल्लीफालतू चैनल सैट कर दिया.. चैनल पर ख़बर आ रही थी- और अब ख़बरें चुनावी चकल्लस की. ब्लॉगजगत के चुनावी दंगल में प्रचार कार्य ज़ोरों पर है. आज मतदान का आख़री दिन है और इटली के बोलोनोया शहर में भारी तादाद में इकट्ठा हुए लोगों ने वरिष्ठ नेतनेता दीपक के समर्थन में विशाल रैली (रैली का चित्र साइड मे देखें)  का आयोजन किया. इस रैली में अच्छी-खासी तादाद उन समलैंगिकों और सेक्स वर्करों की भी थी जिनके बारे में नेटनेता अक्सर सहानुभूतिपूर्वक लिखते आए हैं. माना जा रहा है कि इन चुनावों में मुख्य मुक़ाबला रतलाम और बोलोग्ना के बीच ही होगा. चुनावी चकल्लस से अब पूरी तरह पक चुके मुंगेरी को नींद आ जाती है. 

अगले ही पलों में मोबाइल घनघना उठता है. मुंगेरी फ़ोन कान पर सटाता है तो आवाज़ गूंजती है- अबे वोट दिया किया नहीं..?? दूसरी तरफ़ स्वामी है. मुंगेरी कहता है- नहीं अभी नहीं.. इतनी जल्दी क्या है? स्वामी चिल्लाता है- अबे, तुम्हें हिन्दी की दशा का कुछ भान है भी कि नहीं.. कचरा कर डाला है तुम जैसे लोगों ने हिन्दी का. जाओ और उठकर वोट दो. वरना देश भी गढ्ढे में होगा और हिन्दी भी. तुम साले नॉनसीरियस टाइप के चैनल वाले लोग क्या जानो कि हिन्दी की दशा बिगाड़ने मे तुम्हारा कितना बड़ा कॉन्ट्रीब्यूशन है. हमें देखो..हम हिन्दी का विकास चाहते हैं.. हम फ़ॉरेन में रहकर हिन्दी और हिन्दुत्व को नहीं भूले हैं. तुम इंडिया में रहकर ही दोनों चीज़ें भूल गए? लानत है तुम पर. तुम टोटली लेज़ी टाइप के पर्सन हो. 

मुंगेरी ग़रीब-गुरबा टाइप इस नेटनेता का भाषण सुन रहा था. मुंगेरी को पता है कि उसकी क्या बिसात इस हाईटेक प्राणी के सामने. वो ठहरा सेलरॉन ब्रांड का आदमी जिसका रेम घिसघिसकर सांसें उखड़ने की कगार पर पहुंच चुका है. वो उठा और मतदान केंद्र की ओर चल पड़ा. देखता है कि बूथ के बाहर शामियाना लगाकर रतलामी बैठे हैं और भीतर जाने वाले वोटरों को अपने लेटेस्ट व्यंजल सुना रहे हैं. मुंगेरी को देखते ही छुटते हुए रतलामी बोले- हां बेटाss अब आ गया ना… सुन कान खोलकर.. अगर हमें वोट नहीं दोगे तो सारे लेख प्रिन्ट करके तुम्हारे घर भेज देंगे. दो-चार ट्रक तो निकल ही आएगा. फिर तुम जानों और श्रीमती… घर से नहीं निकलना तो हमें वोट दो. 

मुंगेरी आगे बढ़ा ही था कि हाथ जोड़े बिहारी मिल गए. वो भी चुनावी दंगल में उतरे हैं. मुंगेरी ने पूछा, का हो बिहारी बाबू, ये आपको कौन सा शौक चर्रा गया. बिहारी बोले- हम तो चुनावी गणित लगाकर उतरा हूं. अपना सीधा दांव है कि इन बड़ा-बड़ा सूरमाओं के बीच कहीं क्रॉस वोटिंग हो गई तो अपना फ़ायदा उसी तरह हो जाएगा जइसे कॉग्रेस-भाजपा की लड़ाई में बसपा का होता है.  

मुंगेरी को बिहारी बाबू का गणित समझ नहीं आया..उसकी नज़र अगले पंडाल पर पड़ी जहां गिरीराज अपने कविमित्रों के साथ मिलकर मतदाताओं को पुरानी-बासी रचनाएं सुना रहे थे. सब जानते थे कि गिरीराज का चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन होलसेल में श्रोताओं को पाकर कोई भी कवि मंत्रमुग्ध हो सकता है. सो गिरीराज ने मौक़े का भरपूर फ़ायदा उठाने के लिए तड़के ही पंडाल तान लिया था. मुंगेरी नज़र बचाकर पोलिंग बूथ की ओर लपका और वोट देने के लिए लाइन में लग गया.. पीछे से आवाज़ आई.. पहलीच्च बार दे रहे हो क्या? मुंगेरी ने पलटकर देखा और पूछा- क्यों पांच-दस बार मतदान भी हो रहा है क्या? पीछे खड़े श्रीष कह रहे थे- और क्या सागर, नीलिमा और पंकज सुबह से अब तक आठ-दस बार लाइन में लग चुके है.  

बेचारे मुंगेरी को यहां भी अपने बैकवर्ड होने का अफ़सोस हुआ. वो बिना वोट डाले ही कतार से अलग हो लिया और चल पड़ा घर की ओर वापस.

26 Responses

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  1. atulkumaar said, on September 27, 2007 at 4:46 pm

    बहुत अच्छा लिखा आपने नीरज भाई
    अतुल

  2. आलोक वाणी said, on April 12, 2007 at 11:00 pm

    नीरज भाई नमस्‍ते,
    देखिए आपही की मदद से मैं आज इंटरनेट पर भी हिंदी लिख पा रहा हूं। धन्‍यवाद।

    आपका-
    आलोक वाणी
    सीएनबीसी-आवाज़
    मुंबई

  3. नीरज दीवान said, on February 22, 2007 at 7:23 pm

    वरिष्ठजनों और मित्रों को सादर सप्रेम धन्यवाद. मुझे खुद नहीं पता कि ये कैसे उटपटांग लिख गया. ये तो जीतू भाई को पकड़ों जिन्होंने प्रसाद में भांग मिलाकर मुझे खिला दी थी. यारों मुझको माफ़ करो.. मैं नशे में था. टिप्पणियों के लिए धन्यवाद. आशा करता हूं लेख पढ़कर ही टीप मारी होगी.

  4. ghughutibasuti said, on February 22, 2007 at 2:53 pm

    लेख बहुत अच्छा लगा । अब तो आपको भी अगले चुनाव में खड़ा होना चाहिए । हमारा वोट आपके नाम!
    घुघूती बासूती
    ghughutibasuti.blogspot.com
    miredmiragemusings.blogspot.com/

  5. rachana said, on February 22, 2007 at 12:53 pm

    कोइ विशेषण बचा ही नही!! मजेदार!!

  6. Shrish said, on February 22, 2007 at 4:06 am

    वाह वाह मजा आ गया पढ़कर। इस चुनाव में ये पहली व्यंग्य रचना थी एकदम झकास। हम तो सबको वोट डाल आया हूँ, कोई शिकायत न करना हाँ।

    सुन्दर रचना, बेहतरीन, अल्टीमेट। :)

  7. मानसी said, on February 22, 2007 at 2:22 am

    बहुत अच्छा लिखा है। हर किसी की नब्ज़ बिल्कुल सही पहचानी। “साबूनुमा लेख” :-) चाचा चौधरी किसने नहीं पढ़ा होगा, पर ये प्रयोग बिल्कुल नया है। स्वामी के लिखने के अंदाज़ की भी बिल्कुल सही कापी। ब्लागर्स को बड़े ध्यान से पढते हैं आप, नो डाउट।

  8. SHUAIB said, on February 21, 2007 at 1:28 pm

    अब लगा कि सचमुच चुनाव हो रहे हैं।

  9. सृजन शिल्पी said, on February 21, 2007 at 12:43 pm

    आपने यह पोस्ट लिखकर इंडीब्लॉगीज प्रतियोगिता के चुनाव अभियान में समाँ बाँध दिया। बहुत दिलचस्प, झकास…।

  10. संजीत त्रिपाठी said, on February 21, 2007 at 12:26 pm

    भैया, चुनावी माहौल में किधर कुछ “बंट” रहा था मालुम नही चला नही तो अपन भी लग लेते लाईन में।
    मस्त नीरज, चुटकी लेने की आदत अभी तक बनी ही हुई है तुम्हारी। मजा आ गया पढ़कर भाई

  11. masijeevi said, on February 21, 2007 at 10:12 am

    Chalo’ kisi mahila blogger ka jikra to kiya aapne, bhale hi neelima ka naam farzi voting ki kataar mein hi aaya sahi.

  12. संजय बेंगाणी said, on February 21, 2007 at 9:20 am

    :)

  13. शशि सिंह said, on February 21, 2007 at 9:19 am

    बहुत खुब:)

  14. प्रत्यक्षा said, on February 21, 2007 at 9:13 am

    हा हा ,मज़ा आ गया ।

  15. अभिनव said, on February 21, 2007 at 7:45 am

    भाई वाह,
    कार्टून बड़ा सही बनवाया है आपने, लेख तो जबरदस्त है ही।

  16. समीर लाल said, on February 21, 2007 at 4:10 am

    अल्टीमेट. :)

  17. समीर लाल said, on February 20, 2007 at 8:34 pm

    वाह वाह, बहुत ही मजेदार.झक्कास लेखनी. पटाखे लेकर भागने में मजा बहुत आया. :)
    यह लेख है हाल ऑफ फेम वाला. सच में पूरा दो बार पढ़कर टिप्पणी कर रहे हैं. अगले चुनाव में आप ही को हमारा चुनाव प्रचारक घोषित किया जाता है. :)

  18. जगदीश भाटिया said, on February 20, 2007 at 6:56 pm

    एक बार पहले पढ़ लिया था अब दोबारा पढ़ा. शानदार, संभाल कर रखने लायक लेख।

  19. राजीव said, on February 20, 2007 at 6:51 pm

    क्या बात है! मज़ा आ गया। बार-बार पढ़ा इसे। सभी की पोल खोल दी, अब तो अपने पुलिस-संरक्षण की व्यवस्था कर ही लें। अभी तो आशा है कि गणना के दौरान कोई धांधली न हो

  20. सागर चन्द नाहर said, on February 20, 2007 at 6:12 pm

    एल्लो जी
    हमने अभी तक वोट दिया ही नहीं और हमें भी लपेट लिया की आठ बार लाईन में लग चुके।:)
    अच्छा है लगे रहिये। मजा आ गया पढ़ कर।

  21. अनूप शुक्ला said, on February 20, 2007 at 6:07 pm

    बहुत खूब, धांसू, शानदार, जानदार। मजा आ गया पढ़कर। ये लेख पढ़कर बहुत दिन बाद बार-बार हंसी आयी। शाबास। सबको लपेट लिया और कहते हो किसी से मतलब नहीं, कमाल है। ऊपर वाली फोटो भी चकाचक है। ये समीरलाल से देखो संभाले नहीं संभल रहे हैं वोट-पटाखे!

  22. माहौल चुनावी हो गया है, तो चलिये हम भी मत दान कर देते हैं।

  23. आशीष said, on February 20, 2007 at 3:24 pm

    ये हुयी ना बात !
    अब लगा की कोई चुनाव हो रहे है !:)

  24. संजय बेंगाणी said, on February 20, 2007 at 3:12 pm

    हाँ, अब चुनावी माहौल बना. कुछ धमकी-समकी न हो, तो लगे ही नहीं की वोट देनेका है.

  25. जगदीश भाटिया said, on February 20, 2007 at 3:09 pm

    :D अरे भैया कितना हंसाओगे?
    वाकई चुनाव मैदान बहुतई बोरियत भरा हो रहा था, आपने खूब हंसा दिया।
    वईसे इक बात बताईये प्राईवेट में, वो जो हम सर्किट से फोन करवाया था वो सबका बताने की क्या जरूरत थी?

  26. Jitu said, on February 20, 2007 at 1:51 pm

    ह्म्म! सही लपेटे हो, पहलवान!

    लिखते बाद मे हो, बोर्ड पहले लगाते, लोगो को न्योते पहले ही दे आए थे, कि कल पोस्ट लिखी जाएगी।
    चुनाव आयोग बता रहे थे, कि तुम्हारी पिछली पोस्ट सेन्सर कर दी गयी थी, आचार संहिता के खिलाफ़ थी, इ बात सच है का?

    साथियों ये विरोधी पक्ष का मीडिया वाला है, इसकी बातों पर विश्वास मत करना, और हाँ मुंगेरी की तरह बिना वोट दिए वापस मत आना, नही तो रवि सबके नाम नोट कर लिए है, पोलिंग बूथ पर और हाँ उसने किराए के ट्रक भी मंगवा लिए है। तो वोटिंग करिए और शान से करिए लेकिन एक बार ही।


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