सुंदरी को बचाना है
December 6, 2006 at 12:49 am | In कटाक्ष | 21 Comments

गतांक से आगे
दस मिनट के छोटे से ब्रेक के बाद फ़ुल्ली फ़ालतू चैनल पर रुपाली के दर्शन होते हैं.
रुपाली (लटों को झटकते) – ब्रेक के बाद आपका स्वागत है. हम आपको बता दें कि इस वक़्त आप न्यूज़ चैनल के इतिहास में पहली बार वह देख रहे हैं जो आपने कभी सोचा भी नहीं होगा. एक ऐसी ख़बर जिसने देशभर में हलचल मचा दी है. सिर्फ़ फ़ुल्ली फ़ालतू पर लाइव एंड एक्सक्लूज़िव…..ढक्कनपुरवा के किसान घासीराम की भैंस खूटां तोड़कर आज सुबह से कहीं ग़ायब हो गई है. और इस वक़्त हमारे स्टूडियों में हज़ारों कॉल्स आ रहे हैं. दर्शकों के मैसेज भी मिल रहे हैं जिनकी पूरी-पूरी सहानुभूति घासीराम के साथ है.. सुंदरी के साथ है. इससे पहले दर्शकों की राय जाने, अभी चलते हैं ढक्कनपुरवा जहां हमारी रिपोर्टर निधी खोजी घासीराम के घर पर मौजूद हैं.
टॉस टू निधि (प्रोग्राम प्रोड्यूसर निधि को फिर ताकीद करता है.- This time please don’t discuss about कल्लू! निधि, शुरू करो !!)
निधि- शुक्रिया रुपाली. इस वक़्त मैं ढक्कनपुरवा के किसान घासीराम के घर पर मौजूद हूं. हम बात कर रहे हैं उस वाकये की जो आज सुबह ही हुआ है. देश की राजधानी से महज़ साठ किलोमीटर दूर इस गांव में रहने वाले किसान घासीराम की भैंस आज सुबह तबेले से खूंटा तोड़कर भाग गई है. राजधानी की नाक के नीचे बसे इस छोटे से गांव का यह हादसा पूरे देश को चौंकाने वाला है. जो न सिर्फ़ कई सवाल खड़े करता है बल्कि इस हादसे ने लोगों के मन में देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई आशंकाएं खड़ी कर दी हैं. इस वक़्त मेरे साथ खुद घासीराम मौजूद है जिनकी भैंस सुंदरी सुबह से ग़ायब है. ब्रेक के पहले हमने घासीराम जी से इस पूरे वाकये के बारे में जानना चाहा था. हां, बताइए घासीराम जी..
घासीराम- हुआ यह जी, कि हम सुबह दिशा-मैदान से आए ही थे कि रामलाल साइकल पर सवार होकर हमरे घर आया…
रुपाली- (टोकते हुए) जी घासीराम जी, हां हां हम सुन रहे हैं. सारा देश आपको सुन रहा है. रामलाल के साथ आप कल्लू के घर चले गए. दर्शक यह जानना चाहते हैं कि जिस सुंदरी भैंस के बारे में हम बात कर रहे हैं उसके बारे में विस्तार से बताएं.
निधि- (खीज छुपाते हुए) हां घासीराम जी, जनता जानना चाहती है कि सुंदरी दिखने में कैसी थी, क्या करती थी, उसकी हॉबीज़ क्या थीं? जब आपने उसे आख़री बार देखा था तब उसे देखकर क्या लगा था कि वो ऐसा कर सकती है? उसका किसी पड़ोसी भैंसे से कोई चक्कर वगैरह..?
घासीराम- (परेशान हाल, पहली बार गोरी चिट्टी बहनजी बाज़ू खड़ी होते और बतियाते देख रहा था) जी, हुआ यह कि सुंदरी को तो हम साम ही के चारा बगैरा देके सोने चले गए थे. सुबह रामलाल के साथ चले गए कल्ल…लू…(निधि की खीज देखकर घासीराम सकपका जाता है)
घासीराम- मिट्टी से आके देखा तो हमरी सुंदरी नहीं थी. हम इधर उधर बहुत ढूंढा.. खूंटा तोड़कर चली गई. हाय सुंदरी… (फिर दहाड़ मारकर रोता है) ना जाने हमरी कौन सी बात बुरी लगी, कल ही साम को हम जतन से चारा खिलाए थे. बहुत दूध देती है सुंदरी, पूरे गांव की रौनक थी. हाय सुंदरी….
निधि- क्या सुंदरी का कोई चक्कर वगैरह था?
(इधर स्टूडियों में पीसीआर पर बैठा साउंड इंजीनियर कनखजूर रस्तोगी बुदबुदाता है – ”भइंसी को अपने जैसा समझ लिया है क्या निधि?” और सारे लोग खिलखिलाकर हंसते हैं, गजोधर अनसुना बनकर शिकारी की मुस्कुराहट बिखेरता है)
घासीराम- क्या बहन जी? अरे काहे का चक्कर. किसी भैंसे का हमरा सुंदरी से कोई मुकाबला था क्या पूरे गांव में. पिछले साल ११ गांव की कमपीटेसन में फस्ट आई थी हमरी सुंदरी. कोनो चक्कर वक्कर का सवाल ही नहीं. हमें तो लगता है कि इसमें बिलवा की साजिस है.
रुपाली- घासीराम जी, ये बिलवा कौन है. दर्शक जानना चाहेंगे कि जिस व्यक्ति का नाम आप बता रहे हैं वो कौन है. क्या करता है?
घासीराम- हमरे ही गांव का है. अरे मुन्ना तोरा बाप कहां है रे.
(भीड़ में मुन्ना खड़ा है. कैमरा उधर घूमता है.. अधनंगे और धूल से सने बच्चों के बीच खीसें निपोरता पांच-छह साल का मुन्ना कैमरे पर आकर मानो आह्लादित है)
बिलवा- का बात है रे घासी, काहे हमें पाप का भागीदार बना रहा है. सबको अपने जैसा समझता है का. हम काहे चोरेंगे तोरी भईंस. (भीड़ को चीरकर बिलवा आगे आ जाता है)
(इधर गजोधर घबराकर स्विचिंग कर देता है – टास टू रुपाली)
रुपाली- आप देख रहे हैं हमारी एक्सक्लूज़िव ख़बर.. सीधे ढक्कनपुरवा गांव से.. जहां के घासीराम की इमोशनल स्टोरी टीवी न्यूज़ चैनलों के इतिहास में पहली बार दिखाई जा रही है. इससे पहले कि हम आपको ढक्कनपुरवा ले चलें लेकिन उससे पहले हम स्टूडियो में आए मेहमानों से आपका परिचय कराते हैं. हमारे साथ इस वक़्त मौजूद हैं राष्ट्रीय जानवराधिकार आयोग की अध्यक्ष खेमका आंधी और पशु मनोचिकित्सक सुंदरबाला कस्तूरी. आप अपने मोबाइल से xxxxxxxxxxx डायल कर हमारे एक्सपर्ट से अपने सवाल पूछ सकते हैं. यदि आप अपने संदेश घासीराम और सुंदरी को भेजना चाहते हैं तो हमें xxxx पर एस एम एस भी कर सकते हैं. सबसे अच्छा मैसेज भेजने वाले लकी विजेता को टीनोबॉल वाशिंग पावडर वालों की ओर से गिफ़्ट हैंपर दिया जाएगा.
(झकाझक प्रिटेंट सफेद साड़ी पहनी खेमका आंधी अपना पल्लू थामते हुए कैमरे पर मुस्कान बिखेरती है. हल्के हरे रंग की साड़ी पहनी सुंदरबाला कस्तूरी असहज अनुभव कर रही हैं. सामने कैमरामैन और उसका अस्टिटेंट घूरकर सुंदरबाला को जो देख रहे हैं. यूं भी सुंदरबाला पशु मनोविज्ञान में स्नातक हैं. इन्हें पशुओ की मानसिकता झट से समझ आ जाती है. कुछ ही पलों में अपने को माहौल से अभ्यस्त करने का साहस जुटा लेती हैं)
रुपाली- हम इससे पहले की वापस ढक्कनपुरवा चलें. यहां लेना होगा छोटा-सा ब्रेक. कहीं जाइएगा नहीं मिलते हैं.. ब्रेक के बाद.
(पीसीआर पर बैठा प्रोग्राम प्रोड्यूसर अपने मातहत को पूछता है)
गजोधर- अरे क्या हुआ असेम्बली का? कोई बाइट का जुगाड़ हो रहा है कि नहीं? कॉन्टेक्ट में लो अपने झपटू चरसिया को. मुझे आधा घंटे में रूलिंग और अपोज़ीशन वालों की बाइट चाहिए सुंदरी मामले पर.
कुमार गंभीर- स्स सर.. झपटू सर तो आज नहीं आए. वो कल गिर पड़े थे एक्सवे क्लब के पास. रात को नेता कमर सिंह की पार्टी में टुन्न हो गए थे. पार्किंग के पास चलते हुए ऐसे गिरे की सिर ईंट पर पड़ा और होश घर में आया. कोई ट्रैफ़िक सिपाही उठाकर लाया था. अभी सुबह ही फ़ोन आया था कि कल आएंगे.
गजोधर- अरे यार, ये स्साले स्टार रिपोर्टरों के नखरे भी हज़ार हैं. अच्छा चलो एक काम करो, वो..वो कुमारी छल्लो को असेम्बली भेज दो.
मार गंभीर- लेकिन सर, कुमारी छल्लों के पास असेम्ब्ली का एंटरेन्स पास नहीं है.. उसने तो तीन महीने पहले ही प्रेस ज्वाइन किया है.
गजोधर- अबे, कुमार तेरे को यहां कित्ता साल हो गया रे.. निधि खोजी को एंटरेंस पास की ज़रूरत पड़ी क्या कभी? तुम स्साले बिना खटके बाथरूम नहीं जा सकते वो अशोक हाल तक में घुस जाती है.
कुमार गंभीर- वो कैसे?
गजोधर- सब अभई पूछ लोगे क्या? चलो तुरंत फ़ोन करो छल्लो को और कहो कि कमर सिंह से फ़ोन करवाकर असेम्बली में जाने का जुगाड़ करे. मुझे छल्लो का लाइव चाहिए एक घंटे के अंदर.. सीधे असेम्बली के गलियारे से.
(“सुंदरी को बचाना है“ को हिट होता देखकर खुश हुआ गुल्लू फ़ोन करता है गजोधर को)
गुल्लू- हां गजोधर, क्या प्रोग्रेस है. स्पॉन्सरशिप का क्या चल रहा है? आधा घंटे हो गए आप लोगों में कोई सीरियसनेस है या नहीं? अभी तक पॉलीटिकल स्टेटमेंट नहीं आए हैं. कहां मर गए हैं हमारे रिपोर्टर?
गजोधर- जी जी… सर जी, वही कह रहा हूं. आधे घंटे में सब कुछ हो जाएगा.. ख़बर को अच्छा रिस्पॉस मिल रहा है सर जी, ३२,४५३ मैसेज आ चुके हैं. हमारे नंबर की सभी आठ लाइनें बुक चल रही हैं. दो मिनट में एक्सपर्ट्स से बातचीत शुरू कर रहे हैं.
गुल्लू- अरे हां..गजोधर, ये सुंदरबाला कस्तूरी को फिर बुला लिए. ये बहुत अच्छा किया. इसको बोलना आज रात को डिनर यहीं करेगी हमारे साथ. कभी-कभी तुम कुछ बढ़िया काम भी कर लेते हो. तभी तो हमने तुम्हें रखा है. चलो ठीक है जल्दी से सब कुछ और बढ़िया करो.. ख़बर पर. बाक़ी हम देख लेंगे.
शिकारी की मुस्कुराहट बिखेरता गजोधर फ़ोन रखता है. उधर, दस मिनट के छोटे से ब्रेक के बाद परदे पर फिर रुपाली अवतरित होती हैं.
रुपाली- ब्रेक के बाद आपका फिर स्वागत है. और इस वक़्त आप देख रहे हैं सुंदरी भैंस और उसके मालिक घासीराम की व्यथा कथा. पूरे ग्यारह गांव की सौंदर्य प्रतियोगिता जीत चुकी सुंदरी इस वक़्त लापता है. कोई नहीं जानता कि वो कहां है. किस हाल में हैं. ढकक्नपुरवा गांव के किसान घासीराम की व्यथा कथा जिसे सुंदरी से बेहद लगाव है. एक ऐसे रिश्ते की कहानी जो इंसान और पशुओं के बीच प्रेम की मिसाल बन चुकी है. इस वक़्त सिर्फ़ और सिर्फ़ फुल्ली फ़ालतू पर आप देख रहे हैं. लाइव एंड एक्सक्लूज़िव. इस वक़्त फ़ोनलाइन पर हमारे एक दर्शक जो आगरा से हैं.. मूर्धन्य कुमार.. जी मूर्धन्य कुमार जी अपना सवाल पूछिए.
मूर्धन्य कुमार- जी नमस्ते रुपाली जी, मैं पिछले आधे घंटे से आपका प्रोग्राम देख रहा हूं. घासीराम ने जो बात कल्लू की बताई थी. उसके बारे में विस्तार से जानना चाहता हूं. क्या कल्लू की मौत से सुंदरी के भाग जाने का कोई संबंध है. क्या आप लोग घासीराम जी को बोल सकते हैं कि वो कल्लू किसान की आत्महत्या के बारे में विस्तार से बता दें.
रुपाली- (बीच में टोकते हुए) देखिए, मूर्धन्य जी, इस वक़्त हमारा फ़ोकस उस रिश्ते पर है जो इंसान और पशु के बीच का है. घासीराम की सुंदरी पिछले कई घंटों से वापस तबेले में नहीं आई है. ये मामूली बात नहीं है बल्कि लाखों दर्शकों के मैसेज हमे मिल रहे हैं. वे सुंदरी और घासीराम जी के लिए अपनी संवेदना भेज रहे हैं. ज़ाहिर तौर पर हम यह मानते हैं कि इस मामले में अब हमारी भी अहम ज़िम्मेदारी बन चुकी है. आख़िर सुंदरी को बचाना है और घर वापस लाना है.
(कंट्रोल रूम से दर्शक मूर्धन्य कुमार का फ़ोन काट दिया जाता है. साउंड इंजीनियर कनखजूर रस्तोगी बुदबुदाता है- ‘अबे इतना सीरियस क्वेश्चयन करने वाला मूर्धन्य क्या सचमुच आगरे से था’)
रुपाली- इस मुद्दे पर आप क्या कहेंगी खेमका आंधी जी..
खेमका आंधी- बिलकुल सही कहा आपने रुपाली. इंसान और इंसान के बीच रिश्ते से ज़्यादा महत्व इंसान और पशुओं के बीच के रिश्ते का है. जो आनंद इस रिश्ते में हैं, जो तीव्र संवेदना है वो इंसानी रिश्तों में नहीं हो सकती है. इसलिए मैं हमेशा से पशुओं के प्रति हमारे बर्ताव पर फ़ोकस करती रही हूं. मुझे लगता है कि घासीराम जी की भैंस पर कोई अत्याचार हुआ होगा तभी उसने विद्रोह करना ठीक समझा और खूंटा तोड़कर भाग गई.
रुपाली- आप क्या कहेंगी सुंदरबाला कस्तूरी जी, मानवीय शोषण पर पशुओं का मनोविज्ञान क्या कहता है? क्या यहां किसी तरह के शोषण की आशंका ठीक मालूम पड़ती है आपको?
सुंदरबाला कस्तूरी- यक़ीनी तौर पर.. रूपाली. जैसा कि पशुओं का मनोविज्ञान कहता है कि उन्हें मालिक के व्यवहार की गहरी समझ होती है. मैंने खुद यह कई प्रयोगों में सिद्ध किया है कि हमारे पालतू जानवर हमसे प्यार-दुलार चाहते हैं. मुझे तो घासीराम का बीहेवीयर सही मालूम नहीं पड़ता. आपने देखा होगा कि उसका व्यवहार अपने पड़ोसियों से भी ठीक नहीं है. तभी तो उसने बिलवा और उसके बेटे को तू-तड़ाक से बुलाया था. जब इंसान के साथ ऐसा रिश्ता है तो पशुओं के साथ रिश्ते के बारे मे आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
रुपाली- जी बिलकुल, कस्तूरी जी. आपने जो आशंका जताई है उस पर हमारी टीम निश्चित तौर पर गहरी विवेचना कर रही है. हमारी रिसर्च टीम को भी हमने जानवरों के ऐसे केसेस की स्टडीज़ के लिए कहा है. लेकिन इससे पहले कि हम वापस ढक्कनपुरवा चलें..हमें लेना होगा एक छोटा सा ब्रेक. आप कहीं जाइएगा नहीं.. ब्रेक के बाद हम फिर लौटेंगे आज की सबसे बड़ी ख़बर सुंदरी को बचाना है पर.. मिलते हैं ब्रेक के बाद.
(टप्पू को ढक्कनपुरवा पहुंचे बीस मिनट हो गए हैं. कुछ देर तक इधर-उधर की टोह लेने के बाद वो अपने मोबाइल से गजोधर को फ़ोन लगाता है. गजोधर और टप्पू के बीच चार-पांच मिनट खुसर-पुसर होती है. गजोधर दूसरे मोबाइल से फ़ोन मिलाता है.)
गजोधर- हां मिस्टर एंथोनी, गुड मॉर्निंग. कहिए क्या हाल है?
एंथोनी- ओह गजोधर जी, अरे आप, बड़े दिनो बाद याद किया है. कहिए हमारी याद कैसे आई?
गजोधर- ऐसा है, हमें पता चला है कि आपकी कंपनी जो इंजेक्शन बनाती है, उसमें कुछ गड़बड़ हो रही है..
एंथोनी- क..क..क्या बात है गजोधर जी?? मेरा तो सारा धंधा एक नंबर में होता है. गजोधर जी आपको कोई रॉग इनफ़रमेशन मिली होगी.
गजोधर- ऐसा है.. हमको जानकारी मिली है कि आपकी कंपनी के ऑक्सीटोन इंजेक्शन का इस्तेमाल आजकल ढक्कनपुरवा के गाय-भैस वाले किसान कर रहे हैं. ज़्यादा दूध खींचने के लिए आपकी कंपनी का इंजेक्शन कारगर साबित हो रहा है. पहले ये बताइए कि आपने हमारी सुंदरी वाली ख़बर देखी कि नहीं?
एंथोनी- जी..जी.. ये क्या कह रहे हैं आप? (ऑफ़िस में बैठा एंथोनी चैनल बदलकर फ़ुल्ली फ़ालतू लगाता है) गजोधर जी, आप ये क्या कह रहे हैं. मैं समझा नहीं सर.
गजोधर- ऐसा है.. देखो भई.. इस वक़्त जानवराधिकार आयोग की खेमका जी हमारे साथ हैं. पशुपालक समाज हमारे साथ हैं. और तो और थोड़ी देर में आप अपनी टीवी पर इस इश्यू पर पॉलीटिकल स्टेटमेंट भी देखेंगे. हमे हमारे रिपोर्टरों ने बताया है कि ऑक्सीटोन की ओवरडोज़ से परेशान सुंदरी घासीराम के तबेले से भाग गई है. भई मैंने अभी वो ऑक्सीटोन के खाली पैक इकट्ठे करा लिए है. जानवराधिकार आयोग इस मामले में गंभीर आंदोलन की धमकी दे रहा है.
एंथोनी- (पसीना पोछते हुए) जी.. सर.. जी मैं क्या कर सकता हूं. गजोधर जी. आपके लिए?
गजोधर- अऱे नहीं एंथोनी जी, घबराने की कोई बात नहीं है. आप मल्टीनेशनल कंपनी के इंडिया में सीईओ हैं. आख़िर हमारी सरकार इतनी रिप्यूटेड कंपनी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा नहीं सकती. वैसे हमें यह पक्का हो गया है कि आपके ऑक्सीटोन ब्रांड को CDSCO की मंजूरी अब तक नहीं मिली है. हम मीडियावाले भी इस पंगे में उलझना नहीं चाहते हैं. हम तो बस यह चाहते हैं कि आप इस सुंदरी वाले प्रोग्राम को स्पान्सर कर दें. कहिए क्या विचार है. बुक कर दूं दो खोखे के एड?
एंथोनी- जी..जी सर.. जैसा आप ठीक समझे. देखिए मैं और ना ही हमारी कंपनी इसमें उलझना चाहती है.. प्लीज़ आप संभाल लीजिएगा. मैं टॉम को भेज रहा हूं आपके पास. आप इसे स्पान्सर कर लें.. लेकिन प्लीज़ ऑक्सीटोन ब्रांड नहीं बल्कि आप हमारी ब्रेन डेपलपमेंट पिल्स ‘खपोटॉनिक‘ के नाम पर इसे बुक करें. मैं वीडियो भेज रहा हूं. पंच लाइन है- ‘अकल बड़ी या भैंस‘.. आप जैसा और जब चाहे.. बताइएगा. मैं हाज़िर हो जाउंगा.
गजोधर फ़ोन रखता है.. होठों पर शिकारी मुस्कुराहट बिखर जाती है. उधर चैनल पर स्टूडियो और ढक्कनपुरवा के रिपोर्टस के बीच संवाद जारी रहते हैं. गजोधर, टीवी स्क्रीन देखता है. फिर इंटरकॉम पर चाय ऑर्डर करता है.
ढक्कनपुरवा गांव में घासीराम अपनी भैंस की यादें दर्शकों के बीच सुना रहा है. कुछ अधनंगे बच्चे और मैले-कुचले कपड़े पहने कुछ युवक कैमरे के आसपास फटकते हैं. जिन्हें टप्पू झिड़क देता है. तभी टप्पू की गिद्धदृष्टि दूर एक घर की चौखट पर खड़ी कन्या पर पड़ती है. टप्पू उसके बारे में बिलवा से पूछता है. बिलवा भगवंती नाम की उस कन्या को बुला लेता है. टप्पू को इस कन्या की फ़ेस वेल्यू जम चुकी है. वो निधि खोजी को भगवंती की बाइट लेने का कहता है. कैमरामेन दिलदार का पाउच पूरा मुंह में उड़ेलता है और फिर शूट शुरू कर देता है.
स्टूडियो में बातचीत जारी है. ”सुंदरी को बचाना है” का स्टिंग हर ब्रेक पर भैसे की डकार के साथ शुरू और खत्म होता है. स्क्रीन पर हां और ना के एसएमएस वाला ग्राफ़ दिखाया जा रहा है. फुल्ली फालतू बैठे लोगों के बीच यह प्रोग्राम रोमांच पैदा कर रहा है. जिसकी गवाही एसएमएस से आए स्करोल पर नाच रहे मैसेज दे रहे हैं. तभी पैनल प्रोड्यूसर को पता चलता है कि कुमारी छल्लो असेम्बली पहुंच चुकी है. लाइव के लिए तैयार हैं. गजोधर कंसोल पर बैठ जाता है. चाय आती है. चाय का स्वाद बदला-सा लगा है. गजोधर कारण पूछता है. चपरासी बताता है फुरसतिया जी की भैंस पिछवाड़े बंधी है. उसी को दुहकर चाय तैयार की है. गजोधर मुस्कुराता है. कंट्रोल रूम में सभी खिलखिला उठते हैं.
स्क्रीन पर रुपाली अवतरित है.. खेमका आंधी और सुंदरबाला कस्तूरी दर्शकों के अटपटे सवालों के चटपटे जवाब दे रही हैं. बीच-बीच मे रुपाली ढक्कनपुरवा से निधि खोजी से अपडेट लेती हैं.
रुपाली- और इस वक़्त की सबसे ताज़ा ख़बर इसी मामले में यह है कि हमारी संवाददाता कुमारी छल्लो सीधे असेम्बली से हमारे साथ हैं.
अपना नाम सुनते ही कुमारी छल्लो सावधान हो जाती हैं. कान का टेपा ठीक करते हुए कैमरामैन की तरफ़ देखकर मुस्कुराती हैं. साउंड इंजीनियर कनखजूर रस्तोगी छल्लो को कुर्ता ठीक करने के लिए कहता है और ओके कहता है.
कुमारी छल्लो- जी रुपाली, इस वक़्त मैं असेम्बली के सामने मौजूद हूं. ‘सुंदरी को बचाना है‘ ख़बर का असर देखिए कि असेम्बली में अपोज़ीशन पार्टी ने इस पर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है.
(विपक्ष के नेता मुरली गोरड़िया कुमारी छल्लो को बीच में टोकते हैं बताते हैं कि उनकी पार्टी कामरोको प्रस्ताव लाने जा रही है)
कुमारी छल्लो- इस वक़्त सारा देश सुंदरी को बचाने की कवायद में जुटा हुआ है. गोरड़िया जी, आपका का इस मामले में क्या कहना है?
मुरली गोरड़िया- देखिए, इस सरकार के भरोसे रहना ही खतरे से खाली नहीं है. इंटरनल सिक्यूरिटी का मामला हम पहले से उठाते आ रहे हैं. हाथ कंगन को आरसी क्या अब? जब भैंस की सुरक्षा की गारंटी यह सरकार नहीं ले सकती तो आम आदमी का क्या कहना? हमारी पार्टी आज शाम इस मामले पर अपनी अगली रणनीति बनाने जा रही है. वैसे हमने अब तक यह प्लान कर रखा है कि इस मुद्दे के अलावा असेम्बली में अब किसी भी सूरत मे किसी और मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी. सरकार को जाना ही होगा.
(अपने नेता को जोश में आता देख चट्टू-पट्टू कार्यकर्ता दुगुने जोश से भर जाते हैं. “गाय हमारी माता है! भैंस हमारी मौसी!!” का नारा लगाते हैं. कार्यकर्ताओं के धक्कम-धक्के में कुमारी छल्लो असहज हो जाती हैं.)
रुपाली- तो आपने देखा कि इस घटना को अब विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है ज़ाहिर है कि कहीं न कहीं यह देश की सुरक्षा व्यवस्था और क़ानून व्यवस्था का सवाल बनकर खड़ा हो गया है. हमारे संवाददाता ज़लील शेख ने थोड़ी देर पहले सत्तारूढ दल के मंत्री से इस घटना पर सरकार की सफ़ाई जाननी चाही थी. पेश है ज़लील शेख की रिपोर्ट
(पार्श्वध्वनि के साथ रिपोर्ट चलनी शुरू होती है)
“ढक्कनपुरवा गांव के किसान घासीराम की भैंस के गुम हो जाने की घटना से सारा देश स्तब्ध हो गया है. ११ गांव की सौंदर्य प्रतियोगिता जीत चुकी सुंदरी (स्क्रीन पर तस्वीर उभरती है) आज सुबह घासीराम के तबेले से बिना बताए कहीं चली गई है. राष्ट्रीय जानवराधिकार आयोग इस घटना को पशु अत्याचार का मामला बताकर सीबीआई जांच की मांग कर रहा है. जबकि विपक्ष ने इसे असमेब्ली में मुद्दा बना लिया है. विपक्ष का कहना है कि यह देश की सुरक्षा व्यवस्था में हुई गंभीर चूक का नतीजा है. वहीं दांये बाजू के स्वयंसेवी संघ इस मामले को सीमापार साज़िश के तौर पर देख रहे हैं. बांये बाज़ू के एनजीओ इसे मल्टीनेशनल कंपनियों का षडयंत्र बता रहे हैं. बांये वाले एनजीओ की नेता घोंघा चाटकर का कहना है कि एम एन सी ने देश में दुग्ध उत्पादन को कम करने के लिए यह गंभीर षडयंत्र रचा है. फुल्ली फ़ालतू ने इस आरोपों पर सरकार का पक्ष जानना चाहा तो केंद्रीय मंत्री ने इस घटना पर आधिकारिक बयान देने से इंकार कर दिया. ज़ाहिर है कि सरकार इस मामले में अभी भी पसोपेश में पड़ी हुई है. सरकार के सामने एक तरफ़ परेशानी यह है कि घासीराम की भैंस कैसे वापस आए तो दूसरी परेशानी उसे कल असेम्बली में हो सकती है क्योंकि उसके सहयोगी दल भी सुंदरी मामले में उससे किनारे रहने का मन बना चुके हैं. लेकिन जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के ८ घंटे बीत जाने के बाद भी न तो घासीराम को चैन मिला है और न ही सुंदरी की कोई ख़बर मिली है“ – फुल्ली फ़ालतू ब्यूरो.
रुपाली- यानी यह तय है कि इस वक़्त सरकार के सामने सबसे बड़ी परेशानी सुंदरी की खोज है. इससे पहले कि हम ब्रेक लें आपको बता दें कि अभी-अभी हमारी संवाददाता कुमारी छल्लो ने हमें बताया है कि सरकार ने इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच कमीशन बिठा दिया है. इस मामले में हम ब्रेक के बाद बात करेंगे. आप कहीं जाइएगा नहीं… मिलते हैं ब्रेक के बाद. हमारा मिशन जारी रहेगा.. क्योंकि सुंदरी को बचाना है…..
(स्क्रीन पर ”सुंदरी को बचाना है” का स्टिंग चलता है.. अबकी बार आवाज़ के साथ चित्र भी आते हैं – कार्यक्रम के प्रायोजक हैं – खपोटॉनिक.. अकल बड़ी या भैंस)
अगला भाग जीतेंद्र चौधरी जी के पन्ने पर प्रकाशित होगा.. देखते रहिए फुल्ली फालतू चैनल पर लाइव एंड एक्सक्लूज़िव “सुंदरी को बचाना है“ !!
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Entries and comments feeds.

गजब लिखो हो दिवान साहब.
बहुत ही सटीक व्यंग्य.
मजा आया. अगले भाग का इंतजार है. गुणवत्ता कम न हो.
Comment by संजय बेंग़ाणी — December 6, 2006 #
सही स्टोरी आगे बढाए रहे, बबुआ। हमारा एक्मात्र उद्देश्य होना चाहिए, सुन्दरी को बचाना है।
सभी चिट्ठाकार भाइयों से अनुरोध है कि इस राष्ट्रीय मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करें।
सुन्दरी को बचाना है।
Comment by जीतू — December 6, 2006 #
वाह वाह नीरज भाई वाह बहुत ख़ूब बहुत ख़ूब
आपकी उर्दू बहुत अच्छी है इसी लिए आपने “वक़्त” को सही लिखा लेकिन मैं हमेशा “वक्त” या फिर “वकत” लिखता रहा मगर उसतादजी आजके बाद से मैं भी आपकी तरह सही “वक़्त” लिखा करूंगा – धन्यवाद और बधाई
Comment by SHUAIB — December 6, 2006 #
बहुत अच्छे ! क्या खाका खींचा है । मज़ा आ गया
Comment by प्रत्यक्षा — December 6, 2006 #
बहुत बढिया लिखा है दीवान जी, वैसे यह क्लू महत्वपूर्ण है कि सुंदरी संभवत: अपने मजनू और आशिक के साथ भाग गयी हो
Comment by PRABHAT TANDON — December 6, 2006 #
हमेशा गंभीर विषयों पर पूरे अत्मविश्वास और जोश के साथ लिखने वाले नीरज भाई, कमाल का व्यंग लिखा है भाई, किसी भी तरह से एक शानदार साहित्यिक रचना। बहुत बधाई!!
Comment by जगदीश भाटिया — December 6, 2006 #
आप इतनी अच्छी कमेंट्री कर रहे मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं।
जल्दी ही आपका अपना चैनल शुरू किया जाय।
धन्यवाद!
Comment by राम चन्द्र मिश्र — December 6, 2006 #
बहुत रोचक हास्य-व्यंग्य रचना बन रही है। जारी रखिए…। बधाई।
Comment by सृजन शिल्पी — December 6, 2006 #
दीवान साहब आपने तो एक साथ सारे तंत्र की भद्द पीट दी।
वैसे कहीं फुरसतिया जी ने ही तो भैंस नही भगाई, क्योंकि “कहीं ना कहीं” उसके अपने यार के साथ भागने की आशंका जताई जा रही है। एक देखने वाली बात ये भी है कि सुंदरी को सबसे पहले खोजा भी उन्होंने। कहीं ना कहीं एसी साजिश की बू आ रही है कि उन्होंने सुंदरी को तमाम सब़्ज बाग दिखा कर भगा लिया हो और बात बिगड़ती देख घबरा कर उसे गजोधर के हवाले कर दिया हो।
Comment by अनुराग मिश्र — December 7, 2006 #
बहुत रोचकता के साथ सही जा रहे हैं, नीरज भाई. जारी रखें. आन्नद आया. बहुत मजेदार.
Comment by समीर लाल — December 7, 2006 #
वाह दीवान साहब! मजा आ गया, अहमदाबाद दंगो के वक़्त इक न्यूज चैनल के आफिस में
देखा सीन याद आ गया.. वो कुछ ऐसा था..
गजोधर – कुकरेजा साब गजोधर बोल रहा हूं, सुना है लाल दरवाजा के पास छुरेबाजी हुई है, ४ मरे बता दूं।
कुकरेजा साब – क्यों नौकरी खाने पर लगे हो यार, १ ही कहो, …..बाकी मैने २ कर्फ्यू पास और २ बोतल भेजी है जैसा आपने कहा था…
Comment by नितिन — December 7, 2006 #
वाह ! बहुत सही जा रही है ये श्रृंखला…
सही जगहों पर चोट की है आपने नीरज . बहुत अच्छे !
Comment by मनीष — December 7, 2006 #
कमाल का लिखा है, भाई जी. चैनल के अंदरखाने की जानकारी साफ़ झलक रही है पूरे वृतांत में. बहुत-बहुत धन्यवाद!
Comment by Hindi Blogger — December 7, 2006 #
वाह वाह्!! क्या बात है! आपने तो स्टूडियो के अन्दर और बाहर वालों, किसी को नही छोडा!
Comment by rachana — December 7, 2006 #
ब्लागमंडल वालों को एक साथ श्रीलाल शुक्ल और हरिशंकर परसाईं की सवारी आ गई है! सब राग दरबारी पढने का असर है.
Comment by eswami — December 8, 2006 #
very nice.. it is not just humour but also sharp and direct comment on today’s trends of news channels …. It has all the elements that required to forced the reader to read this article wihtout brake…
thanks
hoping more …. it is created a curiosity .. that what will be the next.. u have hooked all yr readers..
Comment by samrendra kr — December 8, 2006 #
i like your all article please teach me how to write in hindi font please
Comment by Digvijay singh — December 9, 2006 #
दीवान साहब, सही जा रियो हो. ख़बरों को लेकर भम्र में जीने वाले तथाकथित राष्ट्रीय ख़बरिया चैनलों की क्या मस्त मां-बहन की है. सही गुरू, मज़ा आ गया.
Comment by शशि सिंह — December 15, 2006 #
[...] गब्बर किसे बनायेंगे और हेमा मालिनी किसे बनायेंगे। सुंदरी भैंस के गुम होने जैसी अनेक घटनायें इस वर्ष में घटीं। इसके अलावा पूरा साल सामान्य रूप में गुजर गया। [...]
Pingback by आईना ओये गुरू…… « — December 24, 2006 #
वाह नीरज भाई, आपने याद ताज़ा करा दी। आप समझ गए होंगे किसकी। मीडिया ने इतना तो ज़रूर सिखाया है कि सड़े हुए चीज़ को भी कैसे बेचा जाता है। लेकिन आज तक समझ में ये नहीं आई कि लोग ऐसी चीज़ें देखकर हिट क्यों बनाते हैं। क्योंकि जो लगातार दिख रहा है वो बिक भी रहा है। नहीं तो आप तो जानते ही हैं कितनी चीज़ें ऑफ एयर होती गई हैं। लेकिन जो भी हो दुर्भाग्य ही कह सकते हैं जो ऐसी चीज़ें देखी और दिखाई जा रही है।
Comment by खरी खोटी — May 5, 2007 #
wah bhai wah…maaza aa gaya..kamaal hi hai
Comment by rahul — March 23, 2008 #