धुन टीपाकार
October 29, 2006 at 8:58 pm | In सिनेजगत | 16 Commentsधुनें टीपने की आदत हिन्दी फ़िल्मों के संगीतकारों की बड़ी पुरानी है. इनकी इसी आदत की वजह से इन्हें संगीतकार की बजाय आप धुन टीपाकार कह सकते हैं. आप से कोई दो चार नमूनों का पूछ बैठे तो बप्पी लहरी और अनु मलिक का नाम बरबस निकल पड़ेगा. लेकिन ऐसा इन दो के साथ हीं नहीं है. कुछ अंग्रेज़ी अख़बारों और सिने मैगज़ीनों में चोरी की धुनों पर खूब चटखारे लेकर ख़बरें छापी जाती हैं. अपन यहां ज़्यादा कहेंगे नहीं बल्कि धीरे-धीरे पुराने-नए गानों के ओरीजिनल और इनकी टीपी धुनें पाठकों को बताते चलेंगे.
लीजिए सबसे पहले अनु मलिक की लेटेस्ट फ़िल्म उमराव जान का ये गाना सुनिए
अब ज़रा तीन मिनट इसे सुनिए.
दूसरा गाना नदीम-श्रवण ने अपनी फ़िल्म अंश (2002) में रखा था. अनु मियां ने शादी के इस गीत के बीच के हिस्से को अपने गाने का मुखड़ा बना डाला. नदीम पर पाकिस्तानी धुनें चुराने के इल्ज़ाम खूब लगे हैं. अब नदीम की धुनों को कॉपी करने का राइट अनु मलिक को मिल गया है. कहावत है, चोर का माल चंडाल खाए.
अपने मुन्नाभाई के शांतनु मोइत्रा को ही देखो. वो तो और भी उस्ताद निकले.. पहली ही फ़िल्म परिणीता (2005) से अपन ख़ुश हुए थे कि वाह शांतनु भाई आपने तो फ़िल्म संगीत का माधुर्य लौटा दिया. ज़रा इन्हें सुनिए-
कैसी पहेली है ये ज़िंदगानी (परिणीता) - बर्ट केल्मर का A Kiss to Build a Dream On (1951)
लेकिन शांतनु ने दोबारा लगे रहो मुन्नाभाई में भी पलीता लगा दिया. इन्होंने क्लिफ़ रिचर्ड के 1961 में आए सदाबहार गाने को जस का तस उठा लिया. और क्लिफ के हिस्से की ताली अब खुद बटोर रहे हैं. हैं कि नहीं? खुद सुन के देख लो.
पल पल हर पल (लगे रहो मुन्नाभाई) Theme For A Dream (Cliff Richard)
चलो अब धूम- धड़ाका पेश करने वाले प्रीतम चक्रवर्ती की सुनो. धूम मचाले धूम मचाले वाह खूब चला था. साल का सुपरहिट रहा. इनका धूम मचाले Jesse Cook के ‘Mario takes a walk’ टीपा गया था. इन्हीं प्रीतम दादा के कुछ हिट गानों को सुन लेते हैं जिन्हें सुनकर हम तो रोमांटिक हो जाते हैं. इन्हें दाद देते थे.. भई वाह, क्या धुनें है गैंगस्टर की. लेकिन अपन को थोड़ी पता था कि ये भी पहुंचे हुए टीपाकार हैं. चलो इनके गाने तौलते हैं-
भीगी भीगी सी हैं रातें का असल है मोहिनीर घोरागुली बैंड का ये गीत पृथिबी
या अली मदद अली का असल है अरेबिक बैंड गिटारा का ये गीत या ग़ली
लम्हा लम्हा रातें को टीपा गया पाकी सिंगर वारिस बेग़ के गाने कल शब देखा(1998) से
नासाछिद्र गायक हिमेश भाई रेशमिया का हिट सॉग मर जावां मिट जावां (आशिक़ बनाया आपने) पाकिस्तानी गायक फ़ाक़िर महमूद के एलबम आतिश के गाने मर जावां की हुबहू नक़ल रही.
-अनु मलिक का भीगे होंठ तेरे (मर्डर) और पाकिस्तानी गायक नजम सिराज़ का मैनू तेरे नाल
-ऐ दिल तू लाया है (क्या कहना) राजेश रोशन ने टीपा नील सेदका का ओ कैरोल से. इसी गीत को एनआरआई बैंड स्टूरियो नेशन भी टीप चुका है.
-अनु मलिक की हेरा फेरी का गीत जब भी कोई हसीना दरअसल मार्क मॉरिसन के रिटर्न ऑफ़ द मैक से लिया गया था.
-यस बॉस का गीत: सुनिए तो रुकिए तो (जतिन-ललित) हिशम अब्बास के अहला मा फ़ेकी से सीधा टीप लिया गया.
अपन परेशान हैं कि मौलिकता की तारीफ़ करें भी तो किस मुंह से....क्या पता जिसे अपन ओरीजिनल समझे वो उल्लासनगर (USA) ब्रांड की तरह डुप्लीकेट आइटम हो. अब तो तारीफ़ करने से पहले पुराने गानों और अंग्रेज़ी, अरबी या पाकिस्तानी धुनों का ख़्याल भी रखना है. ऐसी सूरत में मुझे मेरा एक शेर याद आता है.
ख़ुदा के वास्ते परदा ना काबे से उठा ज़ालिम,
कहीं ऐसा ना हो यां भी वही काफ़िर सनम निकले.
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले.
देखो अपन ने भी ग़ालिब का शेर टीप लिया.. मौलिकता है ही चीज़ ऐसी जो बैठे बिठाए नहीं मिलती. अगली दफ़ा कुछ पुराने तुर्रमख़ानों की टीपी हुई धुनों पर चर्चा करेंगे. अभी एक बानगी देखिए.. दिल तड़प तड़प के कह रहा है (मधुमति- सलिल चौधरी) असल में पोलिश लोकगीत Szla dzieweczka do gajeczka से प्रभावित था.
(लेख का मकसद किसी भी संगीतकार की प्रतिभा का अवमूल्यन करना कतई नहीं है. प्रेरणा और टीपने के फ़र्क को समझना है)
स्रोतः इंडियाएफ़एम, इटवोफ़्स, पाकिस्तानीम्यूज़िक, म्यूज़िकइंडियाऑनलाइन, यू ट्यूब व अन्य.
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वाह वाह! सही धुलाई किए हो। एक बार मेरे को एक साइट मिली थी, ए आर रहमान और एक विश्व विख्यात संगीतकार की धुनों को सुनाया था, हुबहू एक जैसी, अलबत्ता, असल १० साल पुरानी थी, नयी, दो महीने पुरानी।
धन्य हो बॉलीवुड संगीतकार, ये लोग सिर्फ़ परोसने को ही संगीत निर्देशन कहते है।
Comment by जीतू — October 29, 2006 #
अनु मलिक के बारे में तो बोलिए ही मत सबको पता है। उनका नाम तो टीपू मलिक होना चाहिए। पर उनका संगीत बॉर्डर में बहुत ही अच्छा था। अब ये पता नहीं टीपा हुआ था या मौलिक था पर फ़िर भी इस बात की तो तारीफ़ करनी ही पड़ेगी कि उन्होने बॉर्डर से दिल जीत लिया।
आपने अच्छा शोध किया है।
Comment by bhuvnesh — October 29, 2006 #
शुक्रिया जीतू भाई,
रहमान को भी लपेटेंगे आगे. फ़िलहाल तो इन्हीं का जुगाड़ हुआ है.
शुक्रिया भुवनेश भाई,
अनु की मौलिकता पर सवाल कतई नहीं उठाया जा सकता है. बॉर्डर के अतिरिक्त सोहनी महिवाल और रिफ्यूजी यहां तक कि उमराव जान का अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो.. उत्कृष्ट रचनाएं हैं. अपन मलिक के अलावा औरों की भी चर्चा करते रहेंगे.
Comment by नीरज दीवान — October 30, 2006 #
बढ़िया बखिया उधेड़ी…:)
Comment by समीर लाल — October 30, 2006 #
लगता है पूरा बालीवुड मानसिक और रचनात्मक तौर से दीवालिया हो गया है।
Comment by अनुराग श्रीवास्तव — October 30, 2006 #
नीरज,
आपने स्रोत में “आइटूएफ़एस” का ज़िक्र किया है। कार्तिक की यह लोकप्रिय और मेहनत से बनाई साइट ऐसे गानों के लिए ही है। आप यूआरएल देना भूल गए हैं। बाकी दोस्तों के लिए मैं दे रहा हूँ:
http://www.itwofs.com/
Comment by विनय — October 30, 2006 #
नीरज भाई क्या धोयी है एक एक करके….इन धुनों पर इनाम लेने पहुँच जाते हैं लेकिन कोई मुआ फिटे मुहँ भी असलियत बयान नही करता, अगर करे तो शायद हुक्का पानी बंद होने का खतरा हो। जनाब नकल की बात चली है तो सोच रहा हूँ क्यों ना मै भी ये लेख हूबहू टीप दूँ
मेहनत खूब की है इस लेख को लिखने में।
Comment by Tarun — October 30, 2006 #
धन्य हैं ये संगीतकार जो चोरी की रचनाओं पर सर्वश्रेष्ट होने का पुरस्कार लेने पहुंच जाते हैं और शर्म भी महसुस नहीं करते.
Comment by संजय बेंगाणी — October 30, 2006 #
बहुत बढिया नीरजजी और ये नया नाम “धुन टीपाकार” बहुत पसंद आया
अनूमलिक ने नुसरत फतेह आली खान के आधे से ज़यादा गाने टीपाकाए हैं – और ए आर रहमान के बारे मे आपने कुछ नही लिखा?
Comment by SHUAIB — October 30, 2006 #
बहुत गलत बात है नीरज भाइ, आप इन बेचारों की इज्जत सरे आम उतार रहे हो। बेचारे टीपते कहाँ है उनसे खाली प्रेरणा ही तो लेते हैं। अब आप उसे टीपना कहते हो तो इन बेचारों का क्या दोष
Comment by सागर चन्द नाहर — October 30, 2006 #
वाह! इस संगीतमय धुनाई के लिये बधाई!
Comment by हितेन्द्र — October 30, 2006 #
कल ही पढ़ रहा था कि वो लमहे का चर्चित गीत “क्या मुझे प्यार है” किसी इंडोनेशियाई धुन से मारा गया है और आज आपने इतनी लंबी लिस्ट और थमा दी ।दुख हुआ पढ़ के!
Comment by मनीष — October 30, 2006 #
सही कहा.. अभिषेक की दस का गीत है नाउ है नाउ और आपने जो जिक्र किया हां मुझे प्यार है .. ये दोनों भी चुराए हुए हैं. शुक्रिया जानकारी के लिए
Comment by नीरज दीवान — October 30, 2006 #
मनीष भाई, मैं भी आलाप सुनकर सकते में था, क्योंकि यह आम भारतीय फ़िल्म संगीत परम्परा से हटकर था. इसमें ओपेरा टच है. इंडोनेशियन ग्रुप peterpan ने एक एलबम से संगीतकार प्रीतम ने फ़िल्म वो लम्हे में टीपा है. और गाना हिट करा दिया- क्या मुझे प्यार है.
ये दोनों गाने यहां सुनिए पहले ओरीजिनल
http://www.youtube.com/watch?v=YGGa1cI2tBM
फिर ये टीपा
http://www.youtube.com/watch?v=Ehd-HNcjRes
लगता है आप जैसे सजग श्रोताओं से मेरा कलेक्शन भी बढ़ता चला जाएगा. भई फिर भी मैं अपने संगीत.. सॉरी धुन टीपाकारों की मेहनत की दाद देता हूं जो अपना ज़्यादा वक्त दुनियाभर का संगीत सुनने में लगाते हैं.
Comment by नीरज दीवान — October 31, 2006 #
भईये, सभी अनु मलिक के पीछे पड़े रहते हैं, ये नहीं जानते कि यहाँ सभी टीपकार हैं। कुछ की आपने बताई, एक(या तीन) की मैं बताता हूँ। वो गुल-ए-गुलज़ार हैं शंकर, एहसान और लॉय जिनके संगीत को खूब पसंद किया जाता है। उनका अधिकतर संगीत लैटिन अमेरिकन और स्पेनिश धुनों की नकल होता है। “दिल चाहता है” का अधिकतर संगीत लैटिन अमेरिकन धुनों से उड़ाया हुआ था, वो मैंने तुरंत इसलिए पहचाना क्योंकि कुछ वर्ष पहले मेरे पास दो कैसेट थी जिसमे कुछ लैटिन अमेरिकन स्पेनिश गाने थे जिनसे वो धुनें हूबहू मिलती थी,कोई फ़र्क नहीं। अब इंटरनेट पर कभी दिखाई दी तो उनका लिंक भी अवश्य देंगे।
Comment by Amit — October 31, 2006 #
वाह वाह अच्छा शोध किया आपने। इस पेज का लिंक इन सभी टीपाकारों को भेज देना चाहिए।
Comment by Shrish — November 24, 2006 #