क्यों हूं मैं मीडिया में ?
वे आठ कारण जिनकी वजह से मैं मीडिया में हूं-
मैं नींद से नफ़रत करता हूं.
मैं ज़िंदगी के मज़े ले चुका हूं.
मैं बिना तनाव लिए जी नहीं सकता.
मैं अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहता हूं.
मैं गीता पर विश्वास रखता हूं- कर्म करो लेकिन फल जाए भाड़ में.
मैं इस तर्क को झुठलाना चाहता हूं कि ज़िंदगी में हरेक चीज़ का मकसद होता है.
मैं अपने परिवार वालों से बदला लेना चाहता हूं.
मैं अपने दोस्तों से दुश्मनी मोल लेना चाहता हूं.
ज़ाहिर है कि ऐसे में मीडिया में रहने का ख़ामियाज़ा तो भुगतना ही होगा. वो भी ब्रॉडकास्ट मीडिया में. यानी कोढ़ पर खाज.

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